मै भी बिलकुल नौजावा था॥
वह खूब सूरत से भरी थी॥
ये हमारी परम्परा है...
वह अधूरी रह गयी ॥
हम अधूरे रह गए॥
ये हमारी परम्परा है॥
ख्वाब अधूरे रह गए।
मैंने मुड़ के देखा था ...
वह मुड़ के देखी थी॥
प्रेम पत्र लिखकर के वह॥
खिड़की के अन्दर फेकी थी॥
ख़त लिया पढ़ने खातिर॥
खडा बवंडर हो गया॥
ये हमारी परम्परा है॥
ख्वाब अधूरे रह गए॥
मै अधुरा रह गया ॥
वह अधूरी रह गयी॥
मन की बाते मन रह गयी॥
कुछ दिनों में वह बिछड़ गयी॥
दिन दिनों महसूश करता...
कैसे धोखा हो गया॥
ये हमारी परम्परा है...