गुरुवार, 10 नवंबर 2011

नेता की पुकार जनता की फटकार..

तू सोया था किस मस्ती में ॥


जब आग ली बस्ती में॥


जब काम पड़े तो आते हो॥


हाथ जोड़ चिल्लाते हो॥


मै जनता का सेवक हूँ॥


मेरी विनय स्वीकार करो॥


फिर से खडा हूँ। इलेक्शन में ॥


मेरा भी बेडापार करो॥


जब ठण्ड का कड़क महीना था॥


लोगो का सड़क पे जीना था॥


कितने लोगो की जान गयी॥


कुछ हाय हाय चिल्लाए थे॥


हाथ में लेके कुछ कागज़ ॥


कितने चक्कर लगवाए थे॥


उस दिन तुम न आये ॥


सब आश लगाये बैठे थे॥


अब हाथ जोड़ के बोल रहे हो॥


जब सब तुमसे जब ऐठे है॥


सब समझ गए है चाल तुम्हारी॥


तुम राजनीती के तालिब हो॥


सारे डंडे बरसाए गे ॥


तुम इसके ही काबिल हो॥


क्यों खो गया अपनी मस्ती में॥


जब आग लगी थी बस्ती में..



बुधवार, 9 नवंबर 2011

कैसे उत्थान होगा..

देश का कैसे उत्थान होगा॥


मेरे देश का कैसे मान होगा॥


बढरहा बोराश्ताचार है॥


हो रहा अत्याचार है॥


आम आदमी बेहाल है॥


प्रशासन भी कंगाल है॥


सच का कैसे आजान होगा॥


लीपापोती करके अफसर नोट बनाते है॥


आश्वासन का वादा करके॥


नेता मौज उड़ाते है॥


इनको कैसे फर्क पड़ेगा॥


इनका कैसे ईमान होगा॥



गुरुवार, 3 नवंबर 2011

मौन व्रत तोड़ा अन्ना ने..

मौन व्रत तोड़ के अन्ना ..हिला दिए सिंहासन ॥


लोकपाल बिल पास करो नहीं फिर से करेगे अनसन॥


गांव गाँव पैदल चल कर के सब को बात बतायेगे॥


कैसे नेता भ्रष्ट हुए है जनता को समझाए गे॥


कितने भूखे मरते देश में ॥


कितनो को नहीं मिलता राशन॥


कितना दम है जनता के अन्दर ...


फिर से ताव दिखायेगे...