रविवार, 7 जून 2015

shiksha

ज्ञान के खातिर करो तपस्या ॥
गुरुजनो से मांगो भीख ॥
संस्कारी इंसान बनो ॥
यही हमारे कुल की रीति॥
 सूर्योदय से पहले उठ जाओ ॥
शुभ प्रभात देता बक्शीस ॥
संस्कारी इंसान बनो ॥
यही हमारे कुल की रीति॥
आदर सूचक शब्दों को बोलो ॥
लो बड़ो से हरदम सीख ॥
संस्कारी इंसान बनो ॥
यही हमारे कुल की रीति॥ 

गुरुवार, 4 जून 2015

दिल का लिफाफा खोल के देखो ॥
दिलदार तुम्हे मिल जायेगा ॥
नजरे मिलाते लगेगा झटका ॥
तन तरुवर हिल जायेगा ॥
मंद हवाये चलने लगेगी ॥
जब यार खड़ा मुस्कायेगा ॥
पुष्प झरेगे अम्बर से ॥
तब सावन ऊधम मचायेगा ॥

बुधवार, 3 जून 2015

नजरो का जादू

नजरो का जादू चलाओ न ॥
मुझपर ॥
पहले से मै तो शादी शुदा हूँ ॥
बीबी भी सुन्दर बच्चे अनोखे ॥
ख्वाबो को उनके सजाने जुटा हूँ ॥
किसी और पर जा के ॥
डालो तुम डोरे ॥
मिली जो मुझे है मै उसपर ॥
फ़िदा हूँ ॥