बुधवार, 26 नवंबर 2014

तेरे लिए कँगना चूड़िया ले आये है ॥

तुम आँख मिचौली करती हो ॥
हम तुमसे मिलने आये है ॥
तेरे लिए कँगना चूड़िया ले आये है ॥
हुस्न कली तुम सजी हुयी हो ॥
हर सृंगार से लदी हुयी हो ॥
आँख पलट के इधर तो देखो ॥
कितना उपहार हम लाये है ॥
मिसकाल मार परेशान हो करती ॥
जब बात करू तो बात न करती ॥
दिल में  हमारे झाँक देखो ॥
इस दिल में तुम्हे बसाये है ॥

मंगलवार, 11 नवंबर 2014

बन्दा hai विंदास ॥

ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा hai विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥
लेती उसको फांस ॥
सबक की राह चलाता ॥
अपनी गोदी में भर करके ॥
राते हमें  झुलाता ॥
उसके नैन नुक्श सब ॥
पसंद हमें अंदाज ॥
ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥
सुन्दर सा घर अपना होता ॥
रहते नौकर चाकर ॥
बच्चे होते श्रेष्ट बचन के ॥
करते सब के आदर ॥
आन मान पे आंच न आती ॥
न होता उपहास ॥
ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥