
रहा मुस्टंड नहीं होए बवाल॥
तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल॥
कुछ नहीं लायी सब वहा छोड़ आयी॥
केवल यही मेरे हाथो को हार॥
तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...
तन मन सब पवित्र हमारा॥
छुआ न भवरा न खाया चारा॥
जीवन दान यही उपहार... तुम्हारे।
संस्कारो से सजी धजी मै॥
आँखों की सरारत से भी रची मै।
कभी नहीं आने दूगी भूचाल...
तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...




