सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल..






रहा मुस्टंड नहीं होए बवाल॥




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल॥




कुछ नहीं लायी सब वहा छोड़ आयी॥




केवल यही मेरे हाथो को हार॥




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...




तन मन सब पवित्र हमारा॥




छुआ न भवरा न खाया चारा॥




जीवन दान यही उपहार... तुम्हारे।




संस्कारो से सजी धजी मै॥




आँखों की सरारत से भी रची मै।




कभी नहीं आने दूगी भूचाल...




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...







खुलासा..






अन्ना के हड़ताल से उभर गया अह्दंग॥




रोजय पोल खुलत है रोजय लगत कलंक॥




रोजी लगत कलंक अन्नागिरी काम आई॥




सरकार थोडा सचेत हो तो कुछ हो जायेगी महगाई॥




जनता चैन की सांस लेती नहीं होती जग हंसायी॥




लोकपाल बिल पास होगा यह सन्देश सुनाया है॥




कम होगी महगाई यह भी धरसाया है...




फिर तो ताकतवर बन जायेगी सरकार...




फिर तो शायद ही सहना पड़े फिर हार...




ख़ुशी की शायद देश में उड़े गी फिर पतंग॥




अन्ना के हड़ताल से उभर गया अह्दंग॥
रोजय पोल खुलत है रोजय लगत कलंक॥













मेरा दिल कहता है...

जो लब्ज तुम्हारे होठो पर॥


अब धीरे धीरे आने लगा॥


तेरे हुस्न की मदहोशी ।


मुझपर यूं छाने लगा॥


तेरी धुन पर पैर थिरकते॥


दिल भी गीत अब गाने लगा॥


तेरी आँखों की चंचलता॥


मुझपे हुक्म चलाने लगा..

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

अन्ना के तरकीब बताया है...






जन जन में जो आस जगी है॥




उसको आप जगाये हो॥




क्या हक़ बनाता है भोली जनता का॥




उसको आप बताये हो॥




खोल दिए हो उस पोटरी को ॥




जिसमे सच्चाई की आशा है॥




जन जन का स्वर एक हुआ है॥




सब की यही अभिलाषा है।




इन बेईमानी दानव के चंगुल से॥




कैसे छूटना है बताये हो॥




भ्रष्टाचार की बू आती है॥




सरे सरकारी संस्थाओ में॥




वे शर्म घोट कर पी गए है॥




जीते है आशाओं में॥




गली गली चौराहे पर तुम॥




सच के फूल उगाये हो..

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

अन्ना की तमन्ना






अन्ना की तमन्ना पूर्ण करो प्रभु॥




अन्ना जी सच्चाई ला देगे॥




जब भाग जाएगा भ्रष्टाचार॥




भारत सोने का बन जाएगा...




घूस पात का न रहे जमाना ॥




यहाँ सच्चाई की बीन बजे॥




खिल जाएगा देश हमारा॥




बच्चे सच्चाई के मीत बने॥




तब कोई दुखी नहीं रहेगा॥




ऐसा फूल खिला देगे॥




फिर तो मेरा देश पताका॥




लहर लहर लहराएगा॥




हर के वासे देश का मेरे॥




सच की ज्योति जलाएगा॥




ऐसा फूक लगा दो भगवन...




फिर सच की सच्चाई ला देगे।




अवगुण

विद्रोही से विवाद करना॥


हीनता को झलका देना॥


बात को पर्वतो का पुल बना देना...


ये जीवन में अंतर पैदा करते है...


२२२२२२२


कर्तव्यों को झुठला जाना॥


फ़ोकट में मुह बजाना॥


बेबात पर हंसी आना...


बात को न गला पाना॥


गलत संस्कारों की निशानी है॥


मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011



आके गले लगा जा गर प्रीति नहीं परायी



मै तुझसे प्रीति लगायी



सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

मै डरता नहीं विवादों से...



मै डरता नहीं विवादों से॥



उन गंदे अपवादों से॥



जो देश कंगाल बना रहे है॥



उनके गंदे इरादों से॥ मै डरता नहीं विवादों से॥






घपले पे घपला कर रहे है॥



जनता हुयी बेहाल॥



पूछो किसी दीन दुखिया से॥



क्या है उसका हाल॥



खुद तो छुप कर सोते है॥



काम कराते प्यादों से॥



मै डरता नहीं विवादों से..



रविवार, 9 अक्टूबर 2011

जब दूल्हा बन के जाऊगा..

वह दिन कितना दूर अभी है॥


जब मै व्याह रचाउगा॥


वह शर्माती बैठी होगी॥


मै उसकी मांग सजाउगा॥


बाजे होगे बाराती होगे।


खुशियों की जब आएगी शाम॥


आनंद मगन मै बैठा रहूगा॥


सही जमे ठाढ़ बाट॥


मंत्रो चार के संग ही उसको॥


मंगल सूत्र पहनाउगा॥


हंसी ठिठोली होती रहेगी॥


मै धीरे धीरे शर्माऊगा॥


साली मेरी बहुत पियारी...


उसपे धाक जमाउगा...