अपने भाव विचारों को मै॥
छिन्न भिन्न कर डाला॥
प्यारी प्रिया के यादो में मै॥
पूरी बोतल पी डाला॥
बहक गए थे पाँव मेरे॥
जुबान लड़खड़ाने लग गयी॥
मेरे मन की मर्यादा सब ॥
एक झटके में भग गयी॥
पूरे सारे मोहल्ले को मै॥
नशे में गाली दे डाला...
रोक रहे थे लोग मुझे॥
टोक रहे थे लोग मुझे॥
शम्भू दारू पीता है॥
बोल रहे थे लोग मुझे॥
उस नशा नशीली के चक्कर में॥
कितनो को थप्पड़ जड़ डाला॥
मै मतवाला हाथी बन कर॥
भाग रहा था इधर उधर॥
कुछ हमें देख कर दर जाते थे॥
कुछ हो जाते थे तितर बितर॥
क्रोध तो इतना भड़क गया था॥
मै मार दिया अफसर पर भाला॥