अभी हजारो पोल खुलेगी ॥
लाखो होंगे बेनकाब ॥
भ्रष्टाचार में लिप्त है जितने ॥
उनका चिल्लायेगा पाप ॥
बैंक हँसेगी रोयेगी तिजोरी ॥
मंद पड़ेगी चोरी छिछोरी ॥
मुँह छिपा के जेल जायेगी ॥
जो किये है बढ़ के घात ॥
भ्रष्टाचार में लिप्त है जितने ॥
उनका चिल्लायेगा पाप ॥
रोजी छूटेगी किस्मत फूटेगी ॥
उनके घर में लगेगी आग ॥
डर जायेगे कुछ पिछलग्गू ॥
कुछ देंगे बुराई त्याग ॥
भ्रष्टाचार में लिप्त है जितने ॥
उनका चिल्लायेगा पाप ॥
