मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

दारू

अपने भाव विचारों को मै

छिन्न भिन्न कर डाला

प्यारी प्रिया के यादो में मै

पूरी बोतल पी डाला

बहक गए थे पाँव मेरे

जुबान लड़खड़ाने लग गयी

मेरे मन की मर्यादा सब

एक झटके में भग गयी

पूरे सारे मोहल्ले को मै

नशे में गाली दे डाला...

रोक रहे थे लोग मुझे

टोक रहे थे लोग मुझे

शम्भू दारू पीता है

बोल रहे थे लोग मुझे

उस नशा नशीली के चक्कर में

कितनो को थप्पड़ जड़ डाला

मै मतवाला हाथी बन कर

भाग रहा था इधर उधर

कुछ हमें देख कर दर जाते थे

कुछ हो जाते थे तितर बितर

क्रोध तो इतना भड़क गया था

मै मार दिया अफसर पर भाला

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

जाय देब न विदेश पिया...

सपने में साजन बहुत लुभाते

प्रेम प्रसंग छेड़ गीत सुनाते

हंस हंस के मोहे पाठ पढ़ाते

अपना हक़ मुझपर है जताते

लेते इम्तहान पिया हमरा के

जाय देब विदेश पीया तोहरा के

गाल पे हमरे हाथ फिराते

कच्ची कलियाँ को महकाते

अपने वादे याद दिलाते

जब रूठू तो हमें मनाते

कोरा उठाय लेते हमरा के

जाय देब विदेश पिया तोहरा के

मेरी सूरत की कीरत गाते

फूलो को बालो में लगाते

सब खुशिया हमको पहिनाते...

साड़ी दुनिया की शैरकराते

कहते सजाय देब हमरा के

जाय देब विदेश पिया तोहरा के

आवा नन्दोयी..

बोले रही हंस के आवा नन्दोयी

तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...

गेहू कय पिसान बा बिलकुल महीन

टोय टाय देख लिया तो आये यकीन...

खेतवा तू जोता हम बीज बोयी

बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥

तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...

बहुत दिना से बंजर खेतवा

भूख लगी मोरा खाली पेटवा

बाद मा देखा जायी कब का होयी

बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥

तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...

हमारे सुरतिया पे सब है दीवाना

सांझ सबेरे गावय गाना

बनी मरजाद काहे लौडन खोयी

बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥

तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...

अनोखे कय बिटिया..

अनोखे कय बिटिया बहारे दुआर॥d
दगा दय ओह्के ओढ़नी
जवानी देखान
देख के जवानिया हम ललचाने
अपनी उमरिया का नहीं पहिचाने
मनवा मा हमरे आवा भूचाल
टुकुर टुकुर देखि ओहके जवानिया
रोकिस आपन बढ़निया
हंस के हम बोल दीन कैसे बा हाल
अनोखे कय बिटिया बहारे दुआर...
कहय लाग काका अकिल गय मारी
तोहका कब से पकडिस बिमारी
बात सब समझ गय बन के नादान...
अनोखे के बिटिया बहारे दुआर...

रात ठण्ड मा सिकुड़ गए है

हाथ गोड़ भा पाला

सारी रात जलाय के तापे

चार जाने हम आला

रात कय ड्यूटी खतरनाक बा

दरवाजे पए तैनात

सारी मस्ती छूट गय सब कय

देखाय दिहिस औकात

हेर हेर लड़की हम तापे

भूटुरू होय गे लाला

गुर गुर काँपे देहिया

सुर सुर चले बयार

खडा निनारे मा हम ताकी

छत रहा ओसार...

ऐसा बढ़िया मालिक बाटे

रात भर जपै माला

शनिवार, 10 दिसंबर 2011

होलिया मा भौजी..

होलिया मा भौजी हीला करय
दस दस दायी कपड़ा गीला करय...
मारय देवरवा भर भर पिचकारी
आज हम तोहका करबय उघारी
बड़ा बड़ा लड्डू लीला करय ...
रंग गुलाल से लाल भा चेहरा
देवरा तो बचपन कय मेहरा
चोलिया कय बन्दा ढीला करय
बिछावा करय उदासा करय...

रन्नो सन्नो..

गुस्से में तो आप ही लगती हो वह चाँद

जीवन भर आने नहीं दूंगा तुझपे आंच

तुझपे कोई आंच कभी गुस्सा होना

मेरे से छुप छुप कर कभी कोने में रोना

याद करो वे दिन बचपन के यादे

उस बगिया का आम और यादो की बाराते

लुकाछुपी का खेल जिसमे होता था हर्जाना

पत्तो के गहने बेंच कर तू देती थी जुरमाना

इन बातो को भूल कर तू जायेगी जब रन्नो

मर जाएगा मुरझा कर तेरा ये सन्नो

मुझे छोड़ अगर तू कही जायेगी

मेरी याद तुझे बहुत तडपाएगी

तब मुझको करना याद जमाना क्या कहेगा

तुमको तो बेवकूफ मुझे बेमर्द कहेगा

मानो मेरी बात करलो मुझसे शादी

आने वाले फूल की नहीं होगी बर्बादी

लोग जो जलते आज फिर वे देगे साथ

गुस्से में तो आप ही लगती हो वह चाँद॥

जीवन भर आने नहीं दूंगा तुझपे आंच॥

आँखों में बसे हो तुम..

आँखों में बसे हो तुम...

प्रीतम मेरी प्रीति चुरा के॥

तुम बता दियो हो मै तेरा हूँ

सपनो में मेरे के

जब मिलते हो तुम मुझसे

खिल जाती है कलियाँ

जब चलती हवा मस्तानी

हिलने लगती है बलिया

तुम मीत बने हो मेरे

कहती हूँ मै गा गा के

आँखों में बसे हो तुम...प्रीतम मेरी प्रीति चुरा के॥

खुसिया हंसने लगती है

स्पर्श जब करते तुम हो

बाहों में तुम्हे लपेट लू

अकेले जब मिलते हो

तुम मेरे हो जीवन साथी

मै धन्य हुयी तुम्हे पाके

आँखों में बसे हो तुम...प्रीतम मेरी प्रीति चुरा के॥

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2011

अन्ना के अरमानो का कांग्रेस कुछ ख्याल करो

अन्ना वाला लोकपाल बिल सही ढंग से पास करो

जिससे निखर जाओगे तुम भी वाह वाही भी लूटोगे...

गली गली चौराहे पर सच्चाई की बिगुल को फूकोगे

बच जायेगी साख तुम्हारी जनता पर उपकार करो

अन्ना वाला लोकपाल बिल सही ढंग से पास करो॥

चारो तरफ भ्रष्टाचार है चौहद्दी हुयी बदनाम

बहुत दिनों तक राज करोगे कर लो ये शुभ काम

लोगो की खुशियों की खातिर इतना तो एहसान करो

अन्ना वाला लोकपाल बिल सही ढंग से पास करो॥

माचिस की तीली तलक में बेईमानी की गंध है

६० में ५० तीलिया माचिस की अन्दर बंद है

बहुत बखाने काम कियो हो कुछ सच्चा शुभ का करो

अन्ना वाला लोकपाल बिल सही ढंग से पास करो॥

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

इतनी लम्बी नहीं कमायी

इनका ये.सी कहा से लायी

चार दिन का गए परदेश

देखा इंग्लिश chokaN रहे है

घर में कुछ काम कराय

लिए मोबाईल टहल रहे है

पहले कय सब भूल गए ये

इनके ताकत गयी हेरायी..

इनका ये।सी कहा से लायी॥

दुए पैसा का अहै जेब मा

फूला नहीं समात अहा

मोटर सायकिल पे चढ़ के

रोजी ससुरारी जात अहा

हमरव कौनव इज्जत नाही

दिन भय फरूहा हम चलायी

इनका ये।सी कहा से लायी॥

बाप दादा सब मर के हमरव

येही खेत के माटी मा

२०० रुपिया दिये महीना

हम येहिका चाटी का

इतनी लम्बी फ़ौज है इनकी

इनका सब का का खियाई

इनका ये.सी कहा से लायी॥

रहा पास मेरे जो दिल का खजाना...

उसे साथ अपने लिए जा रहे हो

जियू गी मै कैसे बिना यूं तुम्हारे

मुझे पास किसके किये जा रहे हो

लड़का:

सदा खुश तुम रहना दुआ है हमारी

यही प्यार का पल दिए जा रहा हूँ

लड़की:

तेरी याद आयेगी दिन रत प्यारे

रहूगी मै कैसे किसके सहारे

ये कैसी जुदाई किये जा रहे हो

रहा पास मेरे जो दिल का खजाना...उसे साथ अपने लिए जा रहे हो॥जियू गी मै कैसे बिना यूं तुम्हारे॥मुझे पास किसके किये जा रहे हो॥

:

बुधवार, 7 दिसंबर 2011

कोयल..

कोयल कू कू करती है

बच्चो का मन भरती है

इसकी प्यारी बोली है

लगती कितनी भोली है

इसकी गीत बड़ी मतवाली

सब के मन को भाने वाली

प्यार का गीत सुनाने वाली

मन को बहुत लुभाने वाली

भोर होत उठ कहती बच्चो

उठो सबेरा आया है

चंदा मामा चले है घर को

रवि किरण फैलाया है...

प्रेम की गीत सुनाती है

प्यार का पाठ पठाती है

ऐसे बच्चो एक दिन जग में

नाम अमर कर जाओगे

छोड़े सपने जो बापू थे

पूरा करके दिखाओ गे

मीठी इसकी बोली है

लगती कितनी सोणी है

प्यार का गीत सुनती है

सब का मन बहलाती है

कोयल कू कू करती है॥बच्चो का मन भरती है॥

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

नेता की पुकार जनता की फटकार..

तू सोया था किस मस्ती में ॥


जब आग ली बस्ती में॥


जब काम पड़े तो आते हो॥


हाथ जोड़ चिल्लाते हो॥


मै जनता का सेवक हूँ॥


मेरी विनय स्वीकार करो॥


फिर से खडा हूँ। इलेक्शन में ॥


मेरा भी बेडापार करो॥


जब ठण्ड का कड़क महीना था॥


लोगो का सड़क पे जीना था॥


कितने लोगो की जान गयी॥


कुछ हाय हाय चिल्लाए थे॥


हाथ में लेके कुछ कागज़ ॥


कितने चक्कर लगवाए थे॥


उस दिन तुम न आये ॥


सब आश लगाये बैठे थे॥


अब हाथ जोड़ के बोल रहे हो॥


जब सब तुमसे जब ऐठे है॥


सब समझ गए है चाल तुम्हारी॥


तुम राजनीती के तालिब हो॥


सारे डंडे बरसाए गे ॥


तुम इसके ही काबिल हो॥


क्यों खो गया अपनी मस्ती में॥


जब आग लगी थी बस्ती में..



बुधवार, 9 नवंबर 2011

कैसे उत्थान होगा..

देश का कैसे उत्थान होगा॥


मेरे देश का कैसे मान होगा॥


बढरहा बोराश्ताचार है॥


हो रहा अत्याचार है॥


आम आदमी बेहाल है॥


प्रशासन भी कंगाल है॥


सच का कैसे आजान होगा॥


लीपापोती करके अफसर नोट बनाते है॥


आश्वासन का वादा करके॥


नेता मौज उड़ाते है॥


इनको कैसे फर्क पड़ेगा॥


इनका कैसे ईमान होगा॥



गुरुवार, 3 नवंबर 2011

मौन व्रत तोड़ा अन्ना ने..

मौन व्रत तोड़ के अन्ना ..हिला दिए सिंहासन ॥


लोकपाल बिल पास करो नहीं फिर से करेगे अनसन॥


गांव गाँव पैदल चल कर के सब को बात बतायेगे॥


कैसे नेता भ्रष्ट हुए है जनता को समझाए गे॥


कितने भूखे मरते देश में ॥


कितनो को नहीं मिलता राशन॥


कितना दम है जनता के अन्दर ...


फिर से ताव दिखायेगे...

सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल..






रहा मुस्टंड नहीं होए बवाल॥




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल॥




कुछ नहीं लायी सब वहा छोड़ आयी॥




केवल यही मेरे हाथो को हार॥




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...




तन मन सब पवित्र हमारा॥




छुआ न भवरा न खाया चारा॥




जीवन दान यही उपहार... तुम्हारे।




संस्कारो से सजी धजी मै॥




आँखों की सरारत से भी रची मै।




कभी नहीं आने दूगी भूचाल...




तुम्हारे लिए छोड़ के आयी बंगाल...







खुलासा..






अन्ना के हड़ताल से उभर गया अह्दंग॥




रोजय पोल खुलत है रोजय लगत कलंक॥




रोजी लगत कलंक अन्नागिरी काम आई॥




सरकार थोडा सचेत हो तो कुछ हो जायेगी महगाई॥




जनता चैन की सांस लेती नहीं होती जग हंसायी॥




लोकपाल बिल पास होगा यह सन्देश सुनाया है॥




कम होगी महगाई यह भी धरसाया है...




फिर तो ताकतवर बन जायेगी सरकार...




फिर तो शायद ही सहना पड़े फिर हार...




ख़ुशी की शायद देश में उड़े गी फिर पतंग॥




अन्ना के हड़ताल से उभर गया अह्दंग॥
रोजय पोल खुलत है रोजय लगत कलंक॥













मेरा दिल कहता है...

जो लब्ज तुम्हारे होठो पर॥


अब धीरे धीरे आने लगा॥


तेरे हुस्न की मदहोशी ।


मुझपर यूं छाने लगा॥


तेरी धुन पर पैर थिरकते॥


दिल भी गीत अब गाने लगा॥


तेरी आँखों की चंचलता॥


मुझपे हुक्म चलाने लगा..

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

अन्ना के तरकीब बताया है...






जन जन में जो आस जगी है॥




उसको आप जगाये हो॥




क्या हक़ बनाता है भोली जनता का॥




उसको आप बताये हो॥




खोल दिए हो उस पोटरी को ॥




जिसमे सच्चाई की आशा है॥




जन जन का स्वर एक हुआ है॥




सब की यही अभिलाषा है।




इन बेईमानी दानव के चंगुल से॥




कैसे छूटना है बताये हो॥




भ्रष्टाचार की बू आती है॥




सरे सरकारी संस्थाओ में॥




वे शर्म घोट कर पी गए है॥




जीते है आशाओं में॥




गली गली चौराहे पर तुम॥




सच के फूल उगाये हो..

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

अन्ना की तमन्ना






अन्ना की तमन्ना पूर्ण करो प्रभु॥




अन्ना जी सच्चाई ला देगे॥




जब भाग जाएगा भ्रष्टाचार॥




भारत सोने का बन जाएगा...




घूस पात का न रहे जमाना ॥




यहाँ सच्चाई की बीन बजे॥




खिल जाएगा देश हमारा॥




बच्चे सच्चाई के मीत बने॥




तब कोई दुखी नहीं रहेगा॥




ऐसा फूल खिला देगे॥




फिर तो मेरा देश पताका॥




लहर लहर लहराएगा॥




हर के वासे देश का मेरे॥




सच की ज्योति जलाएगा॥




ऐसा फूक लगा दो भगवन...




फिर सच की सच्चाई ला देगे।




अवगुण

विद्रोही से विवाद करना॥


हीनता को झलका देना॥


बात को पर्वतो का पुल बना देना...


ये जीवन में अंतर पैदा करते है...


२२२२२२२


कर्तव्यों को झुठला जाना॥


फ़ोकट में मुह बजाना॥


बेबात पर हंसी आना...


बात को न गला पाना॥


गलत संस्कारों की निशानी है॥


मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011



आके गले लगा जा गर प्रीति नहीं परायी



मै तुझसे प्रीति लगायी



सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

मै डरता नहीं विवादों से...



मै डरता नहीं विवादों से॥



उन गंदे अपवादों से॥



जो देश कंगाल बना रहे है॥



उनके गंदे इरादों से॥ मै डरता नहीं विवादों से॥






घपले पे घपला कर रहे है॥



जनता हुयी बेहाल॥



पूछो किसी दीन दुखिया से॥



क्या है उसका हाल॥



खुद तो छुप कर सोते है॥



काम कराते प्यादों से॥



मै डरता नहीं विवादों से..



रविवार, 9 अक्टूबर 2011

जब दूल्हा बन के जाऊगा..

वह दिन कितना दूर अभी है॥


जब मै व्याह रचाउगा॥


वह शर्माती बैठी होगी॥


मै उसकी मांग सजाउगा॥


बाजे होगे बाराती होगे।


खुशियों की जब आएगी शाम॥


आनंद मगन मै बैठा रहूगा॥


सही जमे ठाढ़ बाट॥


मंत्रो चार के संग ही उसको॥


मंगल सूत्र पहनाउगा॥


हंसी ठिठोली होती रहेगी॥


मै धीरे धीरे शर्माऊगा॥


साली मेरी बहुत पियारी...


उसपे धाक जमाउगा...