मंगलवार, 11 नवंबर 2014

बन्दा hai विंदास ॥

ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा hai विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥
लेती उसको फांस ॥
सबक की राह चलाता ॥
अपनी गोदी में भर करके ॥
राते हमें  झुलाता ॥
उसके नैन नुक्श सब ॥
पसंद हमें अंदाज ॥
ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥
सुन्दर सा घर अपना होता ॥
रहते नौकर चाकर ॥
बच्चे होते श्रेष्ट बचन के ॥
करते सब के आदर ॥
आन मान पे आंच न आती ॥
न होता उपहास ॥
ऋद्धि सिद्धि प्राप्त है  ॥
बन्दा विंदास ॥
मन करता है जीवन भर को ॥
लेती उसको फांस ॥

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