बुधवार, 12 मार्च 2014

गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २

दगा बाज तूने दाग लगाया ॥
मै दाग छुपाये घूम रही हूँ ॥
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
सोलह साल मेरी उम्र थी ॥
थी कोलम कच्ची कुवारी ॥
आँखों का जादू चला के तूने ॥
बना दिया प्रेम दीवानी ॥
तेरे  बिना अब रह नहीं पाती ॥
तेरी विरह में सूख रही हूँ ॥
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
ख़ुशी के मोती हमें खिला के ॥
प्रेम मोह  की लगन लगा के ॥
मन में अपना दीप जला के ॥
चमन बाग़ में कली खिला के ॥
सातो जनम का नाता जोड़ के ॥
तेरे चरणो को चूम रही हूँ ॥
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २
गली गली तुम्हे ढूढ़ रही हूँ ॥ २ 

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