सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

aasik

पहली बार देखा सुगन्धित कली ॥
जिसे देख कर मै दीवाना हुआ हूँ ॥
ख्यालो में उसके खोया हूँ रहता ॥
आँखों के उसके निशाना  बना हूँ ॥
समझती है पागल दुत्कार देती ॥
फिर भी सुरो का तराना बना हूँ ॥
बहकती बहुत है चहकती बहुत है ॥
दिवानो के महफ़िल का गाना बना हूँ ॥
धड़कने दिल की हमको बताती ॥
अय्यास आशिक बेगाना बना हूँ ॥
पहली बार देखा सुगन्धित कली ॥
जिसे देख कर मै दीवाना हुआ हूँ ॥
ख्यालो में उसके खोया हूँ रहता ॥
आँखों के उसके निशाना  बना हूँ ॥ 

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