(आप को समर्पित )
मै पूछता हूँ कविवर ॥
कविता कैसे बनाते हो ?
शब्दों का सिंगार करके ॥
कविता को सजाते हो ॥
आकर्षण शब्द लिख कर ॥
कविता को रचाते हो ॥
भयानक सोच की महोदय ॥
कविता जब सुनाते हो ॥
सोलह सिंगार करके ॥
कविता जब मुस्कुराती है ॥
तालिया बजती रहती है ॥
मोहिनी बलखाती है ॥
काल्पनिक सोच के आदी ॥
जनाब नजर आते हो ॥
मै पूछता हूँ कविवर ॥
कविता कैसे बनाते हो ?
शब्दों का सिंगार करके ॥
कविता को सजाते हो ॥
आकर्षण शब्द लिख कर ॥
कविता को रचाते हो ॥
भयानक सोच की महोदय ॥
कविता जब सुनाते हो ॥
सोलह सिंगार करके ॥
कविता जब मुस्कुराती है ॥
तालिया बजती रहती है ॥
मोहिनी बलखाती है ॥
काल्पनिक सोच के आदी ॥
जनाब नजर आते हो ॥
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