वह दिन कितना दूर अभी है॥
जब मै व्याह रचाउगा॥
वह शर्माती बैठी होगी॥
मै उसकी मांग सजाउगा॥
बाजे होगे बाराती होगे।
खुशियों की जब आएगी शाम॥
आनंद मगन मै बैठा रहूगा॥
सही जमे ठाढ़ बाट॥
मंत्रो चार के संग ही उसको॥
मंगल सूत्र पहनाउगा॥
हंसी ठिठोली होती रहेगी॥
मै धीरे धीरे शर्माऊगा॥
साली मेरी बहुत पियारी...
उसपे धाक जमाउगा...
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