जो लब्ज तुम्हारे होठो पर॥
अब धीरे धीरे आने लगा॥
तेरे हुस्न की मदहोशी ।
मुझपर यूं छाने लगा॥
तेरी धुन पर पैर थिरकते॥
दिल भी गीत अब गाने लगा॥
तेरी आँखों की चंचलता॥
मुझपे हुक्म चलाने लगा..
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें