सोमवार, 19 दिसंबर 2011

अनोखे कय बिटिया..

अनोखे कय बिटिया बहारे दुआर॥d
दगा दय ओह्के ओढ़नी
जवानी देखान
देख के जवानिया हम ललचाने
अपनी उमरिया का नहीं पहिचाने
मनवा मा हमरे आवा भूचाल
टुकुर टुकुर देखि ओहके जवानिया
रोकिस आपन बढ़निया
हंस के हम बोल दीन कैसे बा हाल
अनोखे कय बिटिया बहारे दुआर...
कहय लाग काका अकिल गय मारी
तोहका कब से पकडिस बिमारी
बात सब समझ गय बन के नादान...
अनोखे के बिटिया बहारे दुआर...

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