सोमवार, 19 दिसंबर 2011

रात ठण्ड मा सिकुड़ गए है

हाथ गोड़ भा पाला

सारी रात जलाय के तापे

चार जाने हम आला

रात कय ड्यूटी खतरनाक बा

दरवाजे पए तैनात

सारी मस्ती छूट गय सब कय

देखाय दिहिस औकात

हेर हेर लड़की हम तापे

भूटुरू होय गे लाला

गुर गुर काँपे देहिया

सुर सुर चले बयार

खडा निनारे मा हम ताकी

छत रहा ओसार...

ऐसा बढ़िया मालिक बाटे

रात भर जपै माला

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