बुधवार, 7 दिसंबर 2011

कोयल..

कोयल कू कू करती है

बच्चो का मन भरती है

इसकी प्यारी बोली है

लगती कितनी भोली है

इसकी गीत बड़ी मतवाली

सब के मन को भाने वाली

प्यार का गीत सुनाने वाली

मन को बहुत लुभाने वाली

भोर होत उठ कहती बच्चो

उठो सबेरा आया है

चंदा मामा चले है घर को

रवि किरण फैलाया है...

प्रेम की गीत सुनाती है

प्यार का पाठ पठाती है

ऐसे बच्चो एक दिन जग में

नाम अमर कर जाओगे

छोड़े सपने जो बापू थे

पूरा करके दिखाओ गे

मीठी इसकी बोली है

लगती कितनी सोणी है

प्यार का गीत सुनती है

सब का मन बहलाती है

कोयल कू कू करती है॥बच्चो का मन भरती है॥

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