सोमवार, 19 दिसंबर 2011

जाय देब न विदेश पिया...

सपने में साजन बहुत लुभाते

प्रेम प्रसंग छेड़ गीत सुनाते

हंस हंस के मोहे पाठ पढ़ाते

अपना हक़ मुझपर है जताते

लेते इम्तहान पिया हमरा के

जाय देब विदेश पीया तोहरा के

गाल पे हमरे हाथ फिराते

कच्ची कलियाँ को महकाते

अपने वादे याद दिलाते

जब रूठू तो हमें मनाते

कोरा उठाय लेते हमरा के

जाय देब विदेश पिया तोहरा के

मेरी सूरत की कीरत गाते

फूलो को बालो में लगाते

सब खुशिया हमको पहिनाते...

साड़ी दुनिया की शैरकराते

कहते सजाय देब हमरा के

जाय देब विदेश पिया तोहरा के

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