सपने में साजन बहुत लुभाते॥
प्रेम प्रसंग छेड़ गीत सुनाते॥
हंस हंस के मोहे पाठ पढ़ाते॥
अपना हक़ मुझपर है जताते॥
लेते इम्तहान पिया हमरा के॥
जाय देब न विदेश पीया तोहरा के॥
गाल पे हमरे हाथ फिराते॥
कच्ची कलियाँ को महकाते॥
अपने वादे याद दिलाते॥
जब रूठू तो हमें मनाते॥
कोरा उठाय लेते हमरा के॥
जाय देब न विदेश पिया तोहरा के॥
मेरी सूरत की कीरत गाते॥
फूलो को बालो में लगाते॥
सब खुशिया हमको पहिनाते...
साड़ी दुनिया की शैरकराते॥
कहते सजाय देब हमरा के॥
जाय देब न विदेश पिया तोहरा के॥
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