बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥
तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...
गेहू कय पिसान बा बिलकुल महीन॥
टोय टाय देख लिया तो आये यकीन...
खेतवा तू जोता हम बीज बोयी॥
बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥
तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...
बहुत दिना से बंजर खेतवा॥
भूख लगी मोरा खाली पेटवा॥
बाद मा देखा जायी कब का होयी॥
बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥
तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...
हमारे सुरतिया पे सब है दीवाना॥
सांझ सबेरे गावय गाना॥
बनी मरजाद काहे लौडन खोयी॥
बोले रही हंस के आवा नन्दोयी॥
तू सान लिया आटा हम रोटी पोयी...
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