नैन मटक्का कर रहे है ॥
भवरे आय के बाग़ में ॥
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
मै तेरा रसपान करूगा ॥
दिल की बताऊगा ॥
सारी रात संग रहूगा ॥
सुबह होते उड़ जाऊगा ॥
तेरे कारण हुआ कलूटा ॥
यही हमारी भाग्य रे ।।
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
तू भी मेरे स्वागत में ॥
सारी महक लुटाएगी ॥
सात स्वरो का साज सजा के ॥
प्रेम गीत को गायेगी ॥
कोई हानि तुम्हे नहीं होगी ॥
न आयेगी आंच रे ॥
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
भवरे आय के बाग़ में ॥
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
मै तेरा रसपान करूगा ॥
दिल की बताऊगा ॥
सारी रात संग रहूगा ॥
सुबह होते उड़ जाऊगा ॥
तेरे कारण हुआ कलूटा ॥
यही हमारी भाग्य रे ।।
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
तू भी मेरे स्वागत में ॥
सारी महक लुटाएगी ॥
सात स्वरो का साज सजा के ॥
प्रेम गीत को गायेगी ॥
कोई हानि तुम्हे नहीं होगी ॥
न आयेगी आंच रे ॥
भर कर अपनी बाहो में ॥
रात कली तू जाग रे ॥
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