रविवार, 9 फ़रवरी 2014

samay kat gaya

बात करते करते ॥
सफ़र कट गया ॥
नाम भी न बताया ॥
गमन कर गया ॥
जा रही थी सुबह ॥
सीधे बागो  में मै ॥
रास्ते में अनोखा ॥
युवक मिल गया ॥
नाम भी न बताया ॥
गमन कर गया ॥
सुन्दर सुरति को ॥
निहारती रही ॥
सारे रास्ते में गुण को ॥
ताड़ती रही ॥
लगा पत्थर पे मानो ॥
कमल खिल गया ॥
नाम भी न बताया ॥
गमन कर गया ॥
बात करते थे अच्छी ॥
बनावट न थी ॥
उनकी बातो को सुन ॥
खूब हंसती रही ॥
मुझको ऐसा लगा की ॥
जहाँ मिल गया ॥
मेरे बालो को सहला के ॥
बोले यूं थे ॥
उनकी हर एक अदा पे ॥
मचलती रही ॥
मुझको ताज्जुब हुआ ॥
मै समझने लगी ॥
मेरी आँखों का जादू ॥
असर कर गया ॥
नाम भी न बताया ॥
गमन कर गया ॥ 

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