सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

सूरज को हंसते जब देखा ॥

सूरज को हंसते जब देखा ॥
तब मन का खिलौना जाग गया ॥
मै दौड़ा जब आरति करने  को ॥
मन मटमैला भाग गया ॥
हंस के फूल भी कहने लगे ॥
अब रवि किरण फैलाया है ॥
गया अँधेरा हुआ सवेरा ॥
दिन दिवाकर लाया है ॥
जब जल से पग को धोने लगा ॥
खुशियो का मौसम नाच गया ॥
मै दौड़ा जब आरति करने  को ॥
मन मटमैला भाग गया ॥
चिड़िया चो चो चो  कहने लगी ॥
समय सुहाना आया है ॥
कलियो पर भवरे हंस हंस के ॥
जब प्रेम तराना गाया है ॥
मै माला ले पहनाने लगा ॥
खुद भाग्य भी मेरा जाग गया ॥
मै दौड़ा जब आरति करने  को ॥
मन मटमैला भाग गया ॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें