सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

daga dee

बड़ी भूल कर दी ॥
दिल में बसा के ॥
तुमने तो दिल में ॥
खंजर चला दी ॥
सजाया था ख्वाबो में ॥
सुन्दर सी बगिया ॥
तुमने तो बागो को ॥
बंजर  बना दी ॥
मेरे हुस्न की खूब ॥
तारीफ़ करके ॥
संग में सिमट कर ॥
तुमने दागा दी ॥
लगा दाग चूनर में ॥
कैसे मिटाऊ ॥
तुमने तो हमको ॥
कलंकित बना दी ॥
बातो में फंस कर ॥
हमने तुम्हारे ॥
दिल में क्यों अपने ॥
तुमको जगह दी ॥
कौन बड़ी गलती ॥
किया हमने जानम ॥
तूने क्यों महगी ॥
हमको सजा दी ॥ 

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