मधुर मधुर बहती हवाये ॥
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥
आया है अनोखा मास ॥
उमगे उड़ रही है ॥
भवरा गीत सुनाता ॥
कालिया खिल रही है ॥
महक रही है क्यारी ॥
मच रहा उल्लास ॥
सजी बसंती मचल रही है ॥
होगा अब उत्पात ॥
मधुर मधुर बहती हवाये ॥
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥
शम्भू नाथ
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥
आया है अनोखा मास ॥
उमगे उड़ रही है ॥
भवरा गीत सुनाता ॥
कालिया खिल रही है ॥
महक रही है क्यारी ॥
मच रहा उल्लास ॥
सजी बसंती मचल रही है ॥
होगा अब उत्पात ॥
मधुर मधुर बहती हवाये ॥
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥
शम्भू नाथ
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें