गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

basant

मधुर मधुर बहती हवाये ॥
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥
आया है अनोखा मास ॥
उमगे उड़ रही है ॥
भवरा गीत सुनाता ॥
कालिया खिल रही है ॥
महक रही है क्यारी ॥
मच रहा उल्लास ॥
सजी बसंती मचल रही है ॥
होगा अब उत्पात ॥
मधुर मधुर बहती हवाये ॥
छोड़ रही संवाद ॥
प्रकृति छटा विखेर रही ॥
आया है मधुमाश ॥

शम्भू नाथ 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें