अब इतना भी तुमको पड़ेगा ॥
जिगर चीर कर के दिखाना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
जब दिलदार का दिल लहू में सने गा ॥
अभी तो तसल्ली तुमको मिलेगी ॥
है प्यार क्या चीज हम भी देखे ॥
भले जान दे कर गुजरना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
होश में हूँ य खामोश मौसम बना ॥
अब तो खंजर उठा कर के मारूँगा मै ॥
दिल्लगी क्या है दिल से पूछता हूँ ॥
अपने सीने से बाहर निकालू गा मै ॥
मुझे भी पता है यही अंत है ॥
जान दे कर मुझे भी बिछड़ना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
जिगर चीर कर के दिखाना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
जब दिलदार का दिल लहू में सने गा ॥
अभी तो तसल्ली तुमको मिलेगी ॥
है प्यार क्या चीज हम भी देखे ॥
भले जान दे कर गुजरना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
होश में हूँ य खामोश मौसम बना ॥
अब तो खंजर उठा कर के मारूँगा मै ॥
दिल्लगी क्या है दिल से पूछता हूँ ॥
अपने सीने से बाहर निकालू गा मै ॥
मुझे भी पता है यही अंत है ॥
जान दे कर मुझे भी बिछड़ना पड़ेगा ॥
तभी शायद तुमको विशवास होगा ॥
मुहब्बत की महफ़िल सजाना पड़ेगा ॥
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