आते बसंत मस्त कालिया खिली है ॥
यौवन भी इजहार करने लगा है ॥
बहती हवा जब जब आनंद आता ॥
मधुमाश मचलने लगा है ॥
सिंगार करके जब मुस्काती ॥
अनोखी आभा से आँखे लजाती ॥
मन भी मगन हो उमड़ने लगा है ॥
अम्बर से धरती तक मोहक अदा है ॥
आते बसंत मस्त कालिया खिली है ॥
यौवन भी इजहार करने लगा है ॥
बहती हवा जब जब आनंद आता ॥
मधुमाश मचलने लगा है ॥
यौवन भी इजहार करने लगा है ॥
बहती हवा जब जब आनंद आता ॥
मधुमाश मचलने लगा है ॥
सिंगार करके जब मुस्काती ॥
अनोखी आभा से आँखे लजाती ॥
मन भी मगन हो उमड़ने लगा है ॥
अम्बर से धरती तक मोहक अदा है ॥
आते बसंत मस्त कालिया खिली है ॥
यौवन भी इजहार करने लगा है ॥
बहती हवा जब जब आनंद आता ॥
मधुमाश मचलने लगा है ॥
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